Om Birla and Subhash Chandra Baheria won in loksabha election 2019 | Matter of Pride for Maheshwari Community | General Election 2019

2019 के आम चुनाव में जीतकर फिर एकबार संसद में पहुंचे 2 माहेश्वरी- ओम बिर्ला और सुभाष चन्द्र बहेरिया (सुभाष बहेड़िया)


There is a wave of happiness in Maheshwari community after the pride of Maheshwari community, Om Birla (Kota-Bundi, Rajasthan) and Subhash Chandra Baheria (Bhilwara, Rajasthan), reached the Parliament after winning the 2019 general election.

Subhash Chandra Baheria, who won the election from Bhilwara, which is known as the stronghold of Maheshwari community in Rajasthan, has created history by becoming the fourth MP in the country to win with the highest number of votes. Only four (4) MPs in the entire country have won by a margin of more than 600,000 votes. Among these, Subhash Chandra Bahedia ji of Maheshwari Samaj has created a history by winning from Bhilwara by a margin of 612,000 votes which will be written in golden letters in the history of India, BJP and Maheshwari Samaj.

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माहेश्वरी समाचार : माहेश्वरी समाज के गौरव सुभाषजी बहेड़िया (भीलवाड़ा, राजस्थान) और ओमजी बिर्ला (कोटा-बूंदी, राजस्थान), 2019 के आम चुनाव में जीतकर फिर एकबार संसद में पहुंचने पर माहेश्वरी समाज में ख़ुशी की लहर है।

राजस्थान में माहेश्वरी समाज का गढ़ कहे जानेवाले भीलवाड़ा से चुनाव जीतनेवाले सुभाषजी बहेड़िया ने देश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतनेवाले चौथे नंबर के सांसद बनकर इतिहास रचा है। पुरे देश में सिर्फ चार (4) ही सांसद 600,000 से ज्यादा मतों के अंतर से विजयी हुए है। इनमें माहेश्वरी समाज के सुभाषजी बहेड़िया ने भीलवाड़ा से 612,000 मतों के अंतर से जित दर्ज करके एक ऐसा इतिहास बना दिया है जो भारत, भाजपा और माहेश्वरी समाज के इतिहास में सुवर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा।

माहेश्वरी समाज के सुभाषजी बहेड़िया और ओमजी बिर्ला के विजयी होने पर माहेश्वरी समाजजनों ने अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए सोशल मिडिया के माध्यम से उनका बढ़-चढ़कर अभिनन्दन किया है, उन्हें शुभकामनाएं दी है। माहेश्वरी अखाड़े के पीठाधिपति प्रेमसुखानंदजी माहेश्वरी, माहेश्वरी महासभा के सभापति श्यामसुंदरजी सोनी, महामंत्री संदीपजी काबरा, अ भा माहेश्वरी युवा संगठन के राजकुमारजी काल्या, ज्येष्ठ साहित्यिक व पत्रकार शरदजी बागड़ी, इंटरनेशनल माहेश्वरी कपल क्लब के अशोकजी सोडानी, भाजपा के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष श्यामजी जाजू, माहेश्वरी एकता टीवी के संचालक राजेशजी गिलड़ा आदि अनेको मान्यवरों ने सुभाषजी बहेड़िया और ओमजी बिर्ला का अभिनन्दन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी है।

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Mahesh Navami 2019: Date and Significance | Mahesh Navami means Origin Day of Maheshwari Community, Maheshwari Vanshotpatti Diwas

Mahesh Navami means origin day of Maheshwari community is the biggest festival of the Maheshwari community. According to the Indian calendar, every year, the Navami of the Shukla Paksha of the month of Jyeshtha is celebrated with the celebration of "Mahesh Navami". This festival is mainly dedicated to the worship of Lord Mahesha (God of Gods Mahadev) and the Goddess Parvati (Goddess Maheshwari). The date of Mahesh Navami in the year 2019 is - Miti Jyeshtha Shukla 9, Tuesday, Yudhishthir Samvat 5161, accordingly English date is 11 June 2019.

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महेश नवमी 2019: उत्सव की तारीख और महत्व -


महेश नवमी अर्थात "माहेश्वरी समाज का उत्पत्ति दिवस", माहेश्वरी समाज का सबसे बड़ा त्यौहार है। भारतीय पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को "महेश नवमी" का उत्सव मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से भगवान महेश (देवों के देव महादेव) और देवी पार्वती (देवी माहेश्वरी) की पूजा आराधना के लिए समर्पित है। वर्ष 2019 में महेश नवमी की तिथि है- मिति ज्येष्ठ शुक्ल 9, मंगलवार, युधिष्ठिर सम्वत 5161, तदनुसार अंग्रेजी तारीख 11 जून 2019.

मान्यता है कि, भगवान महेश और आदिशक्ति माता पार्वति ने ऋषियों के शाप के कारन पत्थरवत् बने हुए 72 क्षत्रिय उमराओं को युधिष्ठिर संवत 9 ज्येष्ठ शुक्ल नवमी के दिन शापमुक्त किया और नया जीवन देते हुए कहा की, "आज से तुम्हारे वंशपर हमारी छाप रहेगी, तुम “माहेश्वरी’’ कहलाओगे". भगवान महेशजी के आशीर्वाद से नया जीवन और "माहेश्वरी" नाम प्राप्त होने के कारन तभी से माहेश्वरी समाज ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को "महेश नवमी" के नाम से 'माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस (माहेश्वरी समाज स्थापना दिवस)' के रूप में मनाता है. भगवान महेश और देवी महेश्वरी (माता पार्वती) की कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई इसलिए भगवान महेश और देवी महेश्वरी को माहेश्वरी समाज के संस्थापक मानकर माहेश्वरी समाज में यह दिन 'महेश नवमी' के नामसे बहुत ही भव्य रूप में और बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है. महेश नवमी का पर्व मुख्य रूप से भगवान महेश (महादेव) और माता पार्वती की आराधना को समर्पित है, उनके द्वारा बताये गए जीवनमार्ग एवं सिद्धांतों पर जीवन जीने के संकल्प के प्रति समर्पित है.

ईसापूर्व 3133 में माहेश्वरी समाज की स्थापना के साथ ही माहेश्वरी समाज को मार्गदर्शित करने के लिए भगवान महेशजी ने माहेश्वरी समाज को "गुरु" प्रदान किये, समाजगुरु बनाये. इन गुरुओं ने माहेश्वरी समाज के लिए कुछ व्यवस्थाएं और कुछ नियम भी बनाए थे. हरएक माहेश्वरी का कर्तव्य है, अनिवार्य दायित्व है कि वो गुरु के बनाए व्यवस्था व नियमों का पालन करे, महेश नवमी का दिन है इस बात के दृढ़संकल्प को दोहराने का ! महेश नवमी का दिन है माहेश्वरी समाज द्वारा अपने समाज के पालक-संरक्षक भगवान महेशजी के प्रति विशेष आभार प्रकट करने का ! भगवान महेशजी, आदिशक्ति माता पार्वती और गुरुओं द्वारा दिखाए-बताये मार्ग पर चलते रहने के प्रति प्रतिबद्धता प्रकट करने का ! अपने आचार-विचार से सम्पूर्ण विश्व के मानव जाती के सामने एक सही जीवनपद्धति सादर करने के जिस महान उद्देश्य से भगवान महेशजी ने माहेश्वरी वंश का, माहेश्वरी समाज का निर्माण किया उस उद्देश्य की पूर्ति में लगे रहने का, समर्पित रहने का !

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माहेश्वरी समाज में युधिष्ठिर सम्वत का है प्रचलन


आज ई.स. 2019 में युधिष्ठिर संवत 5161 चल रहा है. माहेश्वरी वंशोत्पत्ति युधिष्ठिर संवत 9 में हुई है तो इसके हिसाब से माहेश्वरी वंशोत्पत्ति आज से 5152 वर्ष पूर्व हुई है. "महेश नवमी उत्सव 2019" को माहेश्वरी समाज अपना 5152 वा वंशोत्पत्ति दिवस (समाज स्थापना दिवस) मना रहा है.

समयगणना के मापदंड (कैलेंडर वर्ष) को 'संवत' कहा जाता है. किसी भी राष्ट्र या संस्कृति द्वारा अपनी प्राचीनता एवं विशिष्ठता को स्पष्ट करने के लिए किसी एक विशिष्ठ कालगणना वर्ष/संवत (कैलेंडर) का प्रयोग (use) किया जाता है. आज के आधुनिक समय में सम्पूर्ण विश्व में ईसाइयत का ग्रेगोरीयन कैलेंडर प्रचलित है. इस ग्रेगोरीयन कैलेंडर का वर्ष 1 जनवरी से शुरू होता है. भारत में कालगणना के लिए युधिष्ठिर संवत, युगाब्द संवत्सर, विक्रम संवत्सर, शक संवत (शालिवाहन संवत) आदि भारतीय कैलेंडर का प्रयोग प्रचलन में है. भारतीय त्योंहारों की तिथियां इन्ही भारतीय कैलेंडर से बताई जाती है, नामकरण संस्कार, विवाह आदि के कार्यक्रम पत्रिका अथवा निमंत्रण पत्रिका में भारतीय कैलेंडर के अनुसार तिथि और संवत (कार्यक्रम का दिन और वर्ष) बताने की परंपरा है.

माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति जब हुई तब कालगणना के लिए युधिष्ठिर संवत प्रचलन में था. मान्यता के अनुसार माहेश्वरी वंशोत्पत्ति युधिष्ठिर संवत 9 में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के नवमी को हुई है. इसीलिए पुरातन समय में माहेश्वरी समाज में कालगणना के लिए 'युधिष्ठिर संवत' का प्रयोग (use) किया जाता रहा है. वर्तमान समय में देखा जा रहा है की माहेश्वरी समाज में युधिष्ठिर संवत के बजाय विक्रम सम्वत या शक सम्वत का प्रयोग किया जा रहा है. विक्रम या शक सम्वत के प्रयोग में हर्ज नहीं है लेकिन इससे माहेश्वरी समाज की विशिष्ठता और प्राचीनता दृष्टिगत नहीं होती है. जैसे की यदि युधिष्ठिर संवत का प्रयोग किया जाता है तो, वर्तमान समय में चल रहे युधिष्ठिर संवत (वर्ष) में से 9 वर्ष को कम कर दे तो माहेश्वरी वंशोत्पत्ति वर्ष मिल जाता है.

माहेश्वरी संस्कृति की असली पहचान युधिष्ठिर संवत से होती है. माहेश्वरी समाज की सांस्कृतिक पहचान है युधिष्ठिर संवत. इसलिए माहेश्वरी समाज के सांस्कृतिक पर्व-उत्सव, नामकरण, विवाह, गृहप्रवेश, सामाजिक व्यापारिक-व्यावसायिक कार्यों  के अनुष्ठान, इन सबका दिन बताने के लिए युधिष्ठिर संवत का उल्लेख किया जाना चाहिए; विक्रम संवत, शक संवत या अन्य किसी संवत का नहीं (जैसे की- महेश नवमी उत्सव 2019 मित्ति ज्येष्ठ शु. ९, 
मंगलवार, युधिष्ठिर संवत ५१६१, दि. 11 जून 2019).


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Mahesh Navami Significance -


According to traditional belief, the lineage of the Maheshwari origin was done on Jyeshtha Shukla Navami of Yudhishtir Samvat 9, Since then, Maheshwari community has celebrated Jyeshtha Shukla Navami every year with the name of "Mahesh Navami" as the day of origin of the community. Religious and cultural events are performed on this day. This festival reveals complete devotion and faith to Lord Mahesha and Goddess Parvati. It is the most important day in all this community people where several cultural events and rallys are arranged together to make unity and dignity amongst all. The main purpose is to demonstrate the commitment of walking on the path shown by Lord Mahesha, Adishakti Mata Parvati and the Gurus.


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स्थान, समय, स्वागतोत्सुक के सामने छोड़ी गई खाली जगहों को भरकर...
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