Showing posts with label maheshwari symbol. Show all posts
Showing posts with label maheshwari symbol. Show all posts

What is Maheshwari Akhada? Know About Maheshwari Akhada | जानिए माहेश्वरी अखाड़े के बारेमें, क्या है माहेश्वरी अखाड़ा? | Maheshwari Akhara

Maheshwari Akhada is the supreme Gurupeeth of Maheshwari Community, the highest religious-spiritual management body of Maheshwari Samaj. Actually, the tradition of Maheshwari Gurupeeth is more than 5000 years old. When Lord Mahesha (Lord Shiva) founded Maheshwari Samaj on the day of Jyeshtha Shukla Navami in 3133 BC, since then the Maheshwari community celebrates this day as the foundation day of Maheshwari Samaj and in the name of Mahesh Navami. Then, along with the establishment of Maheshwari community, Lord Mahesh ji had entrusted the responsibility of guiding the Maheshwari community to 6 Gurus (Rishis); Maheshwari Gurupeeth tradition was started by these 6 Gurus, But in the time cycle this Maheshwari Gurupeeth tradition got disintegrated. In the year 2008, this highest Gurupeeth of Maheshwari community was legally and officially re-established with the name of Divyshakti Yogpeeth Akhara. At the time of official establishment its name was recorded as "Divyshakti Yogpeeth Akhara", but it is popularly known as "Maheshwari Akhada".

The president of Maheshwari Akhara (Divyashakti Yogpeeth Akhara) is decorated with the title of Maheshacharya. The post of Maheshacharya is equivalent to Shankaracharya and Pope. Only the President (Peethadhipati) of the highest Gurupeeth of Maheshwari Samaj “Divyashakti Yogpeeth Akhara” is entitled/officially authorized to be decorated with the title of “Maheshacharya”. The first Peethadhipati of Maheshwari Gurupeeth was Maharishi Parashar, hence Maharishi Parashara is the Adi Maheshacharya. Presently Yogi Premsukhanand Maheshwari is the Peethadhipati of Divyashakti Yogpeeth Akhara (Maheshwari Akhada) and Maheshacharya.

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

According to the constitution of Maheshwari Akhada, the main function of this Akhada is to protect religion and Maheshwari culture. The main objective of Maheshwari Akhada is to organize, enrich and strengthen Maheshwari community. The main objective of the Akhara is to maintain the culture and cultural identity of the Maheshwari community and to increase unity in the society through well-organized management so that there is all-round development of the society.


on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

जानिए माहेश्वरी अखाड़े के बारेमें, क्या है माहेश्वरी अखाड़ा?

माहेश्वरी अखाड़ा (जिसका आधिकारिक नाम दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा है) माहेश्वरी समुदाय का सर्वोच्च धार्मिक गुरुपीठ है, माहेश्वरी समाज की शीर्ष/सर्वोच्च धार्मिक-आध्यात्मिक प्रबंधन संस्था है। वैसे तो माहेश्वरी गुरुपीठ की परंपरा 5000 वर्ष से भी ज्यादा पुरातन है। जब इसा पूर्व 3133 में, ज्येष्ठ शुक्ल नवमी के दिन भगवान महेश जी ने माहेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति/उत्पत्ति की थी, इसी दिन को माहेश्वरी समुदाय माहेश्वरी समाज के स्थापना दिवस के रूपमें तथा महेश नवमी के नाम से मनाता है। तब माहेश्वरी समुदाय के स्थापना के साथ साथ ही भगवान महेश जी ने माहेश्वरी समाज को मार्गदर्शित करने का दायित्व 6 गुरुओं (ऋषियों) को सौपा था; इन्ही 6 गुरुओं द्वारा माहेश्वरी गुरुपीठ परंपरा की शुरुआत की गई थी लेकिन समय चक्र में यह माहेश्वरी गुरुपीठ परंपरा विघटित हो गई। वर्ष 2008 में माहेश्वरी समाज के इस सर्वोच्च गुरुपीठ को कानूनी एवं आधिकारिक तौर पर "दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा" के नाम से पुनः स्थापित किया गया। आधिकारिक स्थापना के समय इसका नाम "दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा" दर्ज किया गया था, लेकिन यह "माहेश्वरी अखाड़ा" के नाम से प्रसिद्ध है, लोकप्रिय है।

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

For more information about Maheshacharya (महेशाचार्य), click on this link > The Maheshacharya (महेशाचार्य), Peethadhipati – Maheshwari Akhada (Maheshwari Gurupeeth)

माहेश्वरी अखाड़ा (दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा) के पीठाधिपति "महेशाचार्य" की उपाधि से अलंकृत होते है। महेशाचार्य पद शंकराचार्य और पोप के समकक्ष है। केवल माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च गुरुपीठ "दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा" के अध्यक्ष (पीठाधिपति) ही "महेशाचार्य" की उपाधि से अलंकृत होने के अधिकारी है / आधिकारिक रूप से अधिकृत है। माहेश्वरी गुरुपीठ के प्रथम पीठाधिपति महर्षि पराशर थे इसलिए महर्षि पराशर "आदि महेशाचार्य" है। वर्तमान में योगी प्रेमसुखानंद माहेश्वरी "दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा (माहेश्वरी अखाड़ा)" के पीठाधिपति और महेशाचार्य हैं।

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag


माहेश्वरी अखाड़े के विधान के अनुसार इस अखाड़े का मुख्य कार्य धर्म की, माहेश्वरी संस्कृति की रक्षा करना है। माहेश्वरी अखाड़े का मुख्य उद्देश्य माहेश्वरी समाज को संगठित करना, समृद्ध करना, सुदृढ़ करना है। समाज की संस्कृति, सांस्कृतिक पहचान बनाये रखना एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से समाज में एकता को बढ़ाना जिससे की समाज का सर्वांगीण विकास हो यह अखाड़े का प्रमुख उद्देश्य है। आवश्यक होने पर सांस्कृतिक, सामाजिक इत्यादि से सम्बन्धित कार्य भी अखाड़े के माध्यम से किये जाने का प्रावधान है। माहेश्वरी समाज, धर्म और राष्ट्र का गौरव बढ़ाने तथा इनके सर्वांगीण प्रगति और संरक्षण-संवर्धन के लिए कार्य करना माहेश्वरी अखाड़े का मुख्य उद्देश्य है।

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

ज्यादातर माहेश्वरीयोंने कुम्भमेला और उसके सन्दर्भ में अखाड़ा शब्द सुना हुवा है लेकिन 'माहेश्वरी अखाड़ा' के बारे में ना सुना है न उन्हें इसकी जानकारी है तो फिर अचानक ये माहेश्वरी अखाड़ा कहाँ से उत्पन्न हो गया यह प्रश्न मन में आना स्वाभाविक है इसे समझने के लिए हमें पहले कुछ बातों को जानना आवश्यक है ज्यादातर माहेश्वरी लोगों को माहेश्वरी वंशोत्पत्ति कैसे हुई? किसने की? कब हुई? कहाँ हुई? क्यों हुई? इसके बारे में ही जानकारी नहीं है, उस समय और उसके बाद क्या क्या हुवा इसकी भी जानकारी ज्यादातर माहेश्वरीयों को नहीं है इसलिए माहेश्वरी अखाड़े को जानने-समझने से पहले माहेश्वरी समाज की ऐतिहासिक पार्श्वभूमि को जानना होगा... इन उपरोक्त बातों को जानने के लिए पुस्तक "माहेश्वरी उत्पत्ति एवं संक्षिप्त इतिहास" जरूर पढ़े।


संक्षेप में कहें तो, माहेश्वरी वंशोत्पत्ति के अनुसार माहेश्वरीयों/माहेश्वरी समाज को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन करनेका दायित्व भगवान महेशजी ने ऋषि पराशर, सारस्वत, ग्वाला, गौतम, श्रृंगी, दाधीच इन छः (6) ऋषियों को सौपा। कालांतर में इन गुरुओं ने महर्षि भारद्वाज को भी माहेश्वरी गुरु पद प्रदान किया जिससे माहेश्वरी गुरुओं की संख्या सात हो गई जिन्हे माहेश्वरीयों में सप्तर्षि कहा जाता है। इन सप्तगुरुओं ने माहेश्वरी समाज के प्रबंधन और मार्गदर्शन का कार्य सुचारू रूप से चले इसलिए एक 'गुरुपीठ' को स्थापन किया जिसे "माहेश्वरी गुरुपीठ" कहा जाता था। इस माहेश्वरी गुरुपीठ के इष्ट देव 'महेश परिवार' (भगवान महेश, पार्वती, गणेश आदि...) थे सप्तगुरुओं ने माहेश्वरी समाज के प्रतिक-चिन्ह 'मोड़' (जिसमें एक त्रिशूल और त्रिशूल के बीच के पाते में एक वृत्त तथा वृत्त के बीच ॐ (प्रणव) होता है) और ध्वज का सृजन किया (देखें Link > Maheshwari Religious Symbol – Mod) ध्वज को "दिव्य ध्वज" कहा गया दिव्य ध्वज (केसरिया रंग के ध्वजा पर अंकित मोड़ का निशान) माहेश्वरी समाज की ध्वजा बनी (देखें Link > Maheshwari Flag) गुरुपीठ के पीठाधिपति “महेशाचार्य” की उपाधि से अलंकृत थे, इसलिए उन्हें "महेशाचार्य" कहा जाता था (देखें Link > आदि महेशाचार्य)"महेशाचार्य" यह माहेश्वरी समाज का सर्वोच्च गुरु पद माना जाता है। इस माहेश्वरी गुरुपीठ के माध्यम से समाजगुरु माहेश्वरी समाज को मार्गदर्शित करते थे। माना जाता है की वंशोत्पत्ति के बाद कुछ शतकों तक यह गुरुपीठ परंपरा चलती रही, लेकिन समय के प्रवाह में माहेश्वरी गुरुपीठ की यह परंपरा खंडित हो गई (इसी कारन से लगभग पिछले चार हजार वर्षों से माहेश्वरी समाज के गुरुपीठ के बारे में ना किसी ने कुछ सुना ना ही किसी को इसकी जानकारी है)। यह माहेश्वरीयों का, माहेश्वरी समाज का दुर्भाग्य है की जाने-अनजाने में माहेश्वरी समाज अपने गुरुपीठ और गुरूओंको भूलते चले गए। परिणामतः समाज को उचित मार्गदर्शन करनेवाली व्यवस्था ही समाप्त हो गई जिससे समाज की बड़ी हानि हुई है और आज भी हो रही है। माहेश्वरी समाजजनों को समाजहित में इस बात को गंभीरता से समझते हुए सही और उचित दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।


on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

"अखाड़ा" संस्कृत वर्ण माला का शब्द है, इसे व्यापक रूप से सनातन धर्म के 'प्रमुख मठ' के लिए प्रयोग किया जाता है, इसे 'पीठ' भी कहा जाता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़े हमेशा कवच बने रहे। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में इनका बहुत बड़ा योगदान है। अखाड़े के पीठाधिपति प्रायः धर्म गुरु होते है और इनके द्वारा मुख्यतः आध्यात्मिक कार्य और आध्यात्मिक मार्गदर्शन किया जाता है पर ऐसा हमेशा नही होता। आवश्यक होने पर, इन कार्यो के अतिरिक्त सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक इत्यादि से सम्बन्धित कार्य भी अखाड़े के माध्यम से किये जाते हैं। अखाड़े सनातन धर्म के अनुयायियों को मार्गदर्शित और अनुशाषित करनेवाली एक व्यवस्था है जिससे की सनातन धर्म का संरक्षण-संवर्धन हो।

अखाड़ों का इतिहास आदि शंकराचार्य के सनातन धर्म को बचाने के प्रयासों से जुड़ा हुवा है। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने भारत में, देश के चार कोनों में-
(1) उत्तर दिशा में बदरिकाश्रम में "ज्योतिर्पीठ" (स्थापना- युधिष्ठिर संवत् 2641-2645)
(2) पश्चिम में द्वारिका में "द्वारिका शारदा पीठ" (स्थापना- युधिष्ठिर संवत् 2648)
(3) दक्षिण में "शृंगेरी पीठ" (स्थापना- युधिष्ठिर संवत् 2648)
(4) पूर्व दिशा में जगन्नाथपुरी में "गोवर्द्धन पीठ" (स्थापना- युधिष्ठिर संवत् 2655)
इन चार पीठों की स्थापना की। इन चार पीठों के प्रमुखों को 'शंकराचार्य' कहा जाता है। इनका कार्य मात्र आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक ही सिमित था। आदि शंकराचार्य ने इन चार पीठों की स्थापना कर सनातन धर्म का संरक्षण-संवर्धन करने की कोशिश की। लेकिन इसी दौरान उन्हें लगा कि जब समाज में धर्म की विरोधी शक्तियां सिर उठा रही हैं, तो सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति के जरिए ही इन चुनौतियों का मुकाबला करना काफी नहीं है। इसलिए आदि शंकराचार्य ने जोर दिया कि युवा साधु कसरत करके शरीर को सुदृढ़ बनाएं और कुछ हथियार चलाने में भी कुशलता हासिल करें। इसके लिए ऐसे मठ स्थापित किए गए, जहां कसरत के साथ ही हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। ऐसे ही मठों को अखाड़ा कहा जाने लगा। उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि मठ, मंदिरों, श्रद्धालुओं और धर्म की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह अखाड़ों का जन्म हुआ।

वर्तमान समय में व्यायामशाला को भी अखाड़ा कहते हैं और साधु-संन्यासियों के आश्रम, मठ या रुकने के स्थान को भी अखाड़ा कहा जाता है। हालांकि आधुनिक व्यायामशाला (कुश्ती के अखाड़े) का निर्माण समर्थ रामदास स्वामी की देन है, लेकिन संतों के अखाड़ों का निर्माण पुरातन समय से ही चला आ रहा है। पुरातन समय में राष्ट्र और धर्म दोनो की रक्षा के लिए अखाड़े के साधू-संत अपने ज्ञान, साधना (अनुसन्धान), अपनी अस्त्र-शस्त्र विद्या का उपयोग भी किया करते थे। वर्तमान समय में अखाड़े के साधु संत सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का कार्य करते हैं। अखाड़े के पीठाधिपति, आचार्य, साधु-संत और कथावाचक अखाड़े के माध्यम से योग शिक्षा (योग शिविर), कथा वाचन एवं प्रवचन आदि के द्वारा सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करते हैं। आज के समय में भी अखाड़े धर्म तथा राष्ट्र पर संकट आने पर ज्ञान और उचित मार्गदर्शन आदि से लोगों को सही राह पर लाने के लिए तत्पर रहते हैं।

on-the-occasion-of-origin-day-of-maheshwari-community-means-maheshwari-vanshotpatti-utpatti-diwas-mahesh-navami-know-about-maheshwari-akhada-akhara-maheshacharya-premsukhanand-maheshwari-mahesh-navami-date-maheshwari-symbol-and-flag

प्रतिष्ठित माहेश्वरी पुरस्कार दिव्य भूषण क्रिकेटर स्मृति मंधाना को | This award is given on Mahesh Navami by Maheshacharya | Cricketer Smriti Mandhana Awarded Divy Bhushan | स्मृति मानधना (स्मृति मंधाना) को दिव्य भूषण पुरस्कार–2018 | Mahesh Navami–2018

स्मृति मानधना (स्मृति मंधाना) माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च पुरस्कारों में से एक 'दिव्य भूषण' सम्मान से सम्मानित


Indian cricketer Smriti Mandhana has been honored with Divy Bhushan Award, one of the highest awards of Maheshwari Samaj. This honor is given for the distinguished and notable service done by a Maheshwari person in any field. These Maheshwari Awards have been started by Maheshwari Akhada (whose official name is 'Divyashakti Yogpeeth Akhara'), the highest Gurupeeth of Maheshwari community. This award is given to the recipient by the Peethadhipati of Maheshwari Akhada, who is decorated with the title of Maheshacharya, the highest guru post of Maheshwari community (At the present time Yogi Premsukhanand Maheshwari is the Peethadhipati of Maheshwari Akhada and Maheshacharya). These awards are given on Mahesh Navami.

Only maximum 8 Maheshwari persons can be given the Divy Bhushan Award in one year, it is an international level award. A medal and a citation (honor card) are given in this award. The Divy Bhushan is the third highest Maheshwari award in the Maheshwari community, preceded by the Maheshwari Ratna and the Divy Vibhushan and followed by the Divy Shri Award.

indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी स्मृति मानधना (स्मृति मंधाना) को माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च पुरस्कारों में से 'दिव्य भूषण' सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान किसी भी क्षेत्र में माहेश्वरी व्यक्ति द्वारा की गई विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवा के लिए माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च गुरुपीठ, माहेश्वरी अखाड़ा (जिसका आधिकारिक नाम 'दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा' है) के द्वारा शुरू किये गए है। यह पुरस्कार "प्राप्तकर्ता" को माहेश्वरी अखाड़े के पीठाधिपति द्वारा दिया जाता है, जो माहेश्वरी समुदाय के सर्वोच्च गुरु पद "महेशाचार्य" की उपाधि से अलंकृत होते हैं (वर्तमान समय में योगी प्रेमसुखानंद माहेश्वरी माहेश्वरी अखाड़े के पीठाधिपति और महेशाचार्य हैं)। ये पुरस्कार महेश नवमी पर प्रदान किये जाते हैं।

एक वर्ष में अधिकतम 8 माहेश्वरी व्यक्तियों को ही दिव्य भूषण पुरस्कार दिया जा सकता है, यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार है। इस पुरस्कार में एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र (सम्मान पत्र) दिया जाता है। दिव्य भूषण माहेश्वरी समाज में तीसरा सबसे बड़ा माहेश्वरी पुरस्कार है, इससे पहले माहेश्वरी रत्न और दिव्य विभूषण और इसके बाद दिव्य श्री पुरस्कार दिया जाता है।




indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

स्मृति मानधना (स्मृति मंधाना) 

स्मृति मानधना एक विख्यात भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी है, जों भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलती है। खेलों में क्रिकेट को ज्यादातर राष्ट्रों में बहुत पसंद किया जाता है। पहले पुरुषों द्वारा क्रिकेट खेले जाने का बहुत महत्व था लेकिन जैसा की हम सब अब जानते ही हैं की महिलाये भी अब किसी क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं हैं तो क्रिकेट में कैसे पीछे रह सकती हैं। उन महिला क्रिकेट खिलाडियों में से स्मृति मानधना एक ऐसी खिलाडी हैं जिन्होंने अपने अच्छे प्रदर्शन से न केवल महिलाओं का, पुरे राष्ट्र का, बल्कि समस्त माहेश्वरी समाज का नाम पुरे विश्व में ऊंचा कर दिया है। बाएं हाथ से खेलने वाली बल्लेबाज खिलाडी स्मृति मानधना ने अपने अच्छे प्रदर्शन से न केवल भारत में बल्कि पुरे विश्व में अपने माहेश्वरी समाज का नाम रोशन किया है।

Smriti Mandhana Born, Education and Family (स्मृति मानधना जन्म, शिक्षा और परिवार)

स्मृति का जन्म 18 जुलाई 1996 को मुंबई महाराष्ट्र में हुआ। इनके पिता श्रीनिवास मानधना (फॉर्मर डिस्ट्रिक्ट-लेवरल क्रिकेटर) और माता स्मिता मानधना हैं। इनका एक भाई भी है जिसका नाम श्रवण मानधना (फॉर्मर डिस्ट्रिक्ट-लेवरल क्रिकेटर) है। जब ये मात्र दो वर्ष की थी तब इनके माता पिता माधवनगर, सांगली (महाराष्ट्र) में हमेशा के लिए आ कर बस गए जिसके बाद इनकी पूरी शिक्षा और परवरिश माधवनगर, सांगली में ही हुई। इनका पूरा परिवार क्रिकेट से जुड़ा हुआ और एक क्रिकेट प्रेमी परिवार है। स्मृति का क्रिकेट में आने का मन तब हुआ जब इन्होने अपने भाई को अंडर 16 के लिए राज्य स्तर पर क्रिकेट खेलते हुए देखा। स्मृति मात्र 11 वर्ष की आयु में अंडर 19 के लिए क्रिकेट में शामिल कर ली गयी थीं। क्योंकि स्मृति का परिवार पहले से ही क्रिकेट क्षेत्र की अच्छी जानकारी रखता था इसलिए इनकी माता और भाई इनके खाने पीने (पौष्टिक भोजन) का, एक्सरसाइज का, स्वास्थ्य (फिटनेस) का पूरा ध्यान रखते थे ताकि स्मृति पूरी तरह स्वस्थ रहे और क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर पाएं।

Smriti Mandhana Domestic career (डोमेस्टिक करियर)

स्मृति ने अपने करियर में सबसे पहली सफलता डोमेस्टिक स्तर पे पाई जब उन्होंने अक्टूबर 2013 में वडोदरा में अल्मबिक क्रिकेट ग्राउंड पर वेस्ट जोन अंडर 19 टूर्नामेंट में गुजरात के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए 150 गेंदों पर 224 रन बना के नाबाद रहीं। इतना ही नहीं ये वो पहली महिला क्रिकेटर हैं जिन्होंने वनडे में दोहरा शतक लगाया। इसके बाद 2016 में वुमन चैलेंजर ट्रॉफी में इन्होने भारत रेड की और से खेलते हुए 3 अर्धशतक लगातार लगाये। इन्ही में 62 रन की एक ऐसी पारी भी शामिल हैं जिससे इन्होने फाइनल में लगाकर टीम को जीत दिलाई थी।

Smriti Mandhana International career (अंतर्राष्ट्रीय करियर)

स्मृति अपने अच्छे प्रदर्शन से क्रिकेट में अपनी जगह बना चुकी हैं जिसके कारण इन्हे तीनो फार्म में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। इन्होने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय खेल बांग्लादेश के खिलाफ 10 अप्रैल 2013 वनडे में खेला था। इसके बाद इन्होने अपने टेस्ट मैच में करियर की शुरुआत 2014 को इंग्लैंड के खिलाफ वोर्म्स्ली पार्क में खेल के शुरू किया था। जिसमे इन्होने दो पारियों में 22 और 51 रन का योगदान दिया। स्मृति के नाम ने तब उचाइयां छूना शुरू कर दिया जब इन्होने 2017 में वर्ल्डकप के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ 90 रन और वेस्ट इंडीज के खिलाफ 106 रन बना के अपनी टीम को फाइनल तक ले जाने में मदद की। अब इनको इनके प्रदर्शन के लिए पूरा विश्व जान चूका है।

विशेष उल्लेखनीय उपलब्धियां
सितंबर 2016 में, स्मृति ने ब्रिस्बेन हीट टूर्नामेंट के तत्कालीन संस्करण के लिए साइन करने के बाद महिला बिग बैश लीग में खेलने के लिए हस्ताक्षर करने वाली दूसरी भारतीय बन गयी। इस रिकॉर्ड में पहला नाम हरमनप्रीत कौर का है।

स्मृति को साल 2016 में ‘आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर’ पुरुस्कार भी मिल चूका है। इस खिताब को पाने वाली ये पहली महिला खिलाड़ी हैं।

2018 में चेन्नई सुपरकिंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच आईपीएल क्वालीफ़ायर राउंड से पहले महिला टी20 लीग की तर्ज पर एक प्रदर्शनी मैच का आयोजन किया था जिसमे स्मृति ने कप्तानी की थी।

स्मृति को इंग्लैंड की ‘किया सुपर लीग’ की मौजूदा चैम्पियन वेस्टर्न स्टॉर्म टीम ने जून 2018 अपने साथ जोड़ा है। मंधाना एक ऐसी पहली भारतीय महिला खिलाडी हैं जिन्हे इंग्लैंड की महिला टी-20 लीग के किसी क्लब से जुड़ने का मौका मिला है।

स्मृति को 25 सितम्बर 2018 को भारतीय सरकार ने "अर्जुन पुरुस्कार" से सम्मानित किया है।

*उपरोक्त "प्रशस्ति" दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा (माहेश्वरी अखाड़ा) द्वारा प्रकाशित दिव्य भूषण पुरस्कार 2018 की स्मारिका में स्मृति मानधना  के बारेमें  लिखी गई है।

samman-patra-indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

samman-patra-indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

samman-chinha-indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

samman-chinha-indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

indian-cricketer-smriti-mandhana-awarded-with-third-highest-award-of-maheshwari-community-divy-bhushan-award-this-award-is-given-on-mahesh-navami-by-maheshacharya

Mahesh Navami 2019: Date and Significance | Mahesh Navami means Origin Day of Maheshwari Community, Maheshwari Vanshotpatti Diwas

Mahesh Navami means origin day of Maheshwari community is the biggest festival of the Maheshwari community. According to the Indian calendar, every year, the Navami of the Shukla Paksha of the month of Jyeshtha is celebrated with the celebration of "Mahesh Navami". This festival is mainly dedicated to the worship of Lord Mahesha (God of Gods Mahadev) and the Goddess Parvati (Goddess Maheshwari). The date of Mahesh Navami in the year 2019 is - Miti Jyeshtha Shukla 9, Tuesday, Yudhishthir Samvat 5161, accordingly English date is 11 June 2019.

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

महेश नवमी 2019: उत्सव की तारीख और महत्व -


महेश नवमी अर्थात "माहेश्वरी समाज का उत्पत्ति दिवस", माहेश्वरी समाज का सबसे बड़ा त्यौहार है। भारतीय पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को "महेश नवमी" का उत्सव मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से भगवान महेश (देवों के देव महादेव) और देवी पार्वती (देवी माहेश्वरी) की पूजा आराधना के लिए समर्पित है। वर्ष 2019 में महेश नवमी की तिथि है- मिति ज्येष्ठ शुक्ल 9, मंगलवार, युधिष्ठिर सम्वत 5161, तदनुसार अंग्रेजी तारीख 11 जून 2019.

मान्यता है कि, भगवान महेश और आदिशक्ति माता पार्वति ने ऋषियों के शाप के कारन पत्थरवत् बने हुए 72 क्षत्रिय उमराओं को युधिष्ठिर संवत 9 ज्येष्ठ शुक्ल नवमी के दिन शापमुक्त किया और नया जीवन देते हुए कहा की, "आज से तुम्हारे वंशपर हमारी छाप रहेगी, तुम “माहेश्वरी’’ कहलाओगे". भगवान महेशजी के आशीर्वाद से नया जीवन और "माहेश्वरी" नाम प्राप्त होने के कारन तभी से माहेश्वरी समाज ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को "महेश नवमी" के नाम से 'माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस (माहेश्वरी समाज स्थापना दिवस)' के रूप में मनाता है. भगवान महेश और देवी महेश्वरी (माता पार्वती) की कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई इसलिए भगवान महेश और देवी महेश्वरी को माहेश्वरी समाज के संस्थापक मानकर माहेश्वरी समाज में यह दिन 'महेश नवमी' के नामसे बहुत ही भव्य रूप में और बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है. महेश नवमी का पर्व मुख्य रूप से भगवान महेश (महादेव) और माता पार्वती की आराधना को समर्पित है, उनके द्वारा बताये गए जीवनमार्ग एवं सिद्धांतों पर जीवन जीने के संकल्प के प्रति समर्पित है.

ईसापूर्व 3133 में माहेश्वरी समाज की स्थापना के साथ ही माहेश्वरी समाज को मार्गदर्शित करने के लिए भगवान महेशजी ने माहेश्वरी समाज को "गुरु" प्रदान किये, समाजगुरु बनाये. इन गुरुओं ने माहेश्वरी समाज के लिए कुछ व्यवस्थाएं और कुछ नियम भी बनाए थे. हरएक माहेश्वरी का कर्तव्य है, अनिवार्य दायित्व है कि वो गुरु के बनाए व्यवस्था व नियमों का पालन करे, महेश नवमी का दिन है इस बात के दृढ़संकल्प को दोहराने का ! महेश नवमी का दिन है माहेश्वरी समाज द्वारा अपने समाज के पालक-संरक्षक भगवान महेशजी के प्रति विशेष आभार प्रकट करने का ! भगवान महेशजी, आदिशक्ति माता पार्वती और गुरुओं द्वारा दिखाए-बताये मार्ग पर चलते रहने के प्रति प्रतिबद्धता प्रकट करने का ! अपने आचार-विचार से सम्पूर्ण विश्व के मानव जाती के सामने एक सही जीवनपद्धति सादर करने के जिस महान उद्देश्य से भगवान महेशजी ने माहेश्वरी वंश का, माहेश्वरी समाज का निर्माण किया उस उद्देश्य की पूर्ति में लगे रहने का, समर्पित रहने का !

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance
Mahesh Navami 2019 Logo PNG

माहेश्वरी समाज में युधिष्ठिर सम्वत का है प्रचलन


आज ई.स. 2019 में युधिष्ठिर संवत 5161 चल रहा है. माहेश्वरी वंशोत्पत्ति युधिष्ठिर संवत 9 में हुई है तो इसके हिसाब से माहेश्वरी वंशोत्पत्ति आज से 5152 वर्ष पूर्व हुई है. "महेश नवमी उत्सव 2019" को माहेश्वरी समाज अपना 5152 वा वंशोत्पत्ति दिवस (समाज स्थापना दिवस) मना रहा है.

समयगणना के मापदंड (कैलेंडर वर्ष) को 'संवत' कहा जाता है. किसी भी राष्ट्र या संस्कृति द्वारा अपनी प्राचीनता एवं विशिष्ठता को स्पष्ट करने के लिए किसी एक विशिष्ठ कालगणना वर्ष/संवत (कैलेंडर) का प्रयोग (use) किया जाता है. आज के आधुनिक समय में सम्पूर्ण विश्व में ईसाइयत का ग्रेगोरीयन कैलेंडर प्रचलित है. इस ग्रेगोरीयन कैलेंडर का वर्ष 1 जनवरी से शुरू होता है. भारत में कालगणना के लिए युधिष्ठिर संवत, युगाब्द संवत्सर, विक्रम संवत्सर, शक संवत (शालिवाहन संवत) आदि भारतीय कैलेंडर का प्रयोग प्रचलन में है. भारतीय त्योंहारों की तिथियां इन्ही भारतीय कैलेंडर से बताई जाती है, नामकरण संस्कार, विवाह आदि के कार्यक्रम पत्रिका अथवा निमंत्रण पत्रिका में भारतीय कैलेंडर के अनुसार तिथि और संवत (कार्यक्रम का दिन और वर्ष) बताने की परंपरा है.

माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति जब हुई तब कालगणना के लिए युधिष्ठिर संवत प्रचलन में था. मान्यता के अनुसार माहेश्वरी वंशोत्पत्ति युधिष्ठिर संवत 9 में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के नवमी को हुई है. इसीलिए पुरातन समय में माहेश्वरी समाज में कालगणना के लिए 'युधिष्ठिर संवत' का प्रयोग (use) किया जाता रहा है. वर्तमान समय में देखा जा रहा है की माहेश्वरी समाज में युधिष्ठिर संवत के बजाय विक्रम सम्वत या शक सम्वत का प्रयोग किया जा रहा है. विक्रम या शक सम्वत के प्रयोग में हर्ज नहीं है लेकिन इससे माहेश्वरी समाज की विशिष्ठता और प्राचीनता दृष्टिगत नहीं होती है. जैसे की यदि युधिष्ठिर संवत का प्रयोग किया जाता है तो, वर्तमान समय में चल रहे युधिष्ठिर संवत (वर्ष) में से 9 वर्ष को कम कर दे तो माहेश्वरी वंशोत्पत्ति वर्ष मिल जाता है.

माहेश्वरी संस्कृति की असली पहचान युधिष्ठिर संवत से होती है. माहेश्वरी समाज की सांस्कृतिक पहचान है युधिष्ठिर संवत. इसलिए माहेश्वरी समाज के सांस्कृतिक पर्व-उत्सव, नामकरण, विवाह, गृहप्रवेश, सामाजिक व्यापारिक-व्यावसायिक कार्यों  के अनुष्ठान, इन सबका दिन बताने के लिए युधिष्ठिर संवत का उल्लेख किया जाना चाहिए; विक्रम संवत, शक संवत या अन्य किसी संवत का नहीं (जैसे की- महेश नवमी उत्सव 2019 मित्ति ज्येष्ठ शु. ९, 
मंगलवार, युधिष्ठिर संवत ५१६१, दि. 11 जून 2019).


maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

Mahesh Navami Significance -


According to traditional belief, the lineage of the Maheshwari origin was done on Jyeshtha Shukla Navami of Yudhishtir Samvat 9, Since then, Maheshwari community has celebrated Jyeshtha Shukla Navami every year with the name of "Mahesh Navami" as the day of origin of the community. Religious and cultural events are performed on this day. This festival reveals complete devotion and faith to Lord Mahesha and Goddess Parvati. It is the most important day in all this community people where several cultural events and rallys are arranged together to make unity and dignity amongst all. The main purpose is to demonstrate the commitment of walking on the path shown by Lord Mahesha, Adishakti Mata Parvati and the Gurus.


maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance

maheshwari-samaj-ka-utpatti-diwas-mahesh-navami-festival-2019-celebration-date-and-significance
स्थान, समय, स्वागतोत्सुक के सामने छोड़ी गई खाली जगहों को भरकर...
इस बैनर का प्रयोग (use) करें।

Maheshwari Samaj : Divy Shri Award – fourth (4th) Highest Award Of Maheshwari Community | दिव्यश्री पुरस्कार – माहेश्वरी समाज का चौथा सर्वोच्च पुरस्कार | These Awards Are Given On Mahesh Navami

Only maximum 16 Maheshwari persons can be given the Divy Shri (Divyshri) Award in one year, it is an international level award. A medal and a citation (honor card) are given in this award. Divy Shri (Divyshri), also spelled Divy Shree, Divya Shree or Divyashree, is the fourth (4th) highest Maheshwari award of the Maheshwari community, after the Maheshwari Ratna, the Divy Vibhushan and the Divy Bhushan. Divy Shri or Divyshri is an award generally given only to Maheshwaris for their special contribution in various fields of life like spirituality, art, education, industry, literature, science, sports, medicine, social service and public life etc. It also includes services rendered by the Maheshwari person as a government servant.

This prestigious Maheshwari Award of Maheshwari Samaj are given by the highest Gurupeeth of Maheshwari Samaj "Maheshwari Akhada (whose official name is 'Divyashakti Yogpeeth Akhara')". These awards are announced every year in the month of December and generally on the day of Mahesh Navami, they are given by the Maheshacharya, the supreme Guru of Maheshwari community.

divy-shri-awards-prestigious-awards-of-maheshwari-community-puraskar-which-are-given-by-the-maheshacharya-on-mahesh-navami

एक वर्ष में अधिकतम 16 माहेश्वरी व्यक्तियों को ही दिव्यश्री पुरस्कार दिया जा सकता है, यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार है। इस पुरस्कार में एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र (सम्मान पत्र) दिया जाता है माहेश्वरी रत्न, दिव्य विभूषण और दिव्य भूषण के बाद दिव्य श्री (दिव्यश्री) पुरस्कार माहेश्वरी समाज का चौथा सर्वोच्च माहेश्वरी पुरस्कार है। दिव्यश्री पुरस्कार आम तौर पर माहेश्वरीयों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे आध्यात्मिकता, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। इसमें सरकारी कर्मचारी के तौर पर माहेश्वरी व्यक्ति द्वारा की गई सेवाएं भी शामिल हैं।


माहेश्वरी समाज का यह प्रतिष्ठित माहेश्वरी पुरस्कार माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च गुरुपीठ "माहेश्वरी अखाड़ा (जिसका आधिकारिक नाम 'दिव्यशक्ति योगपीठ अखाड़ा' है)" के द्वारा दिया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल दिसंबर महीने में की जाती है और आम तौर पर महेश नवमी के दिन ये माहेश्वरी समाज के सर्वोच्च गुरु महेशाचार्य द्वारा दिए जाते हैं।

दिव्यश्री पदक (मेडल) का डिजाइन -
दिव्य श्री पुरस्कार के पदक (मेडल) का डिजाइन गोलाकार है। गोल हिस्‍से की गोलाई 4.4 सेंटीमीटर तथा मोटाई करीब 0.6 मिलीमीटर है। इसके ऊपर गोलाकार में सामने से एक सितारे (1 Star) की नक्‍काशी की गई है। एक सितारे के ऊपर 'दिव्य' और निचे 'श्री' हिंदी लिपि में उकेरा गया है। इसके पीछे गोलाकार में माहेश्वरी समाज के प्रतीक चिन्‍ह- मोड़ की नक्‍काशी की गई है। मोड़ के निचे हिंदी में 'माहेश्वरी' उकेरा गया है।


Monthly Newsmagazine Dedicated To Maheshwari Community — Maheshwari Samachar | माहेश्वरी समाचार - माहेश्वरी समाज के प्रति समर्पित मासिक पत्रिका

Maheshwari Samachar is an Indian Hindi-language monthaly newsmagazine and digital news media owned and managed by The monthaly newsmagazine Divy Maheshwari. Maheshwari Samachar Patrika is mainly dedicated to share all the activities and news related to Maheshwari community with the people of Maheshwari community.

maheshwari-samachar-monthly-newsmagazine-dedicated-to-maheshwari-community

माहेश्वरी समाचार एक भारतीय हिंदी भाषा की मासिक समाचार पत्रिका और डिजिटल समाचार मीडिया है जिसका स्वामित्व और प्रबंधन मासिक समाचार पत्रिका दिव्य माहेश्वरी के पास है। माहेश्वरी समाचार पत्रिका मुख्य रूप से माहेश्वरी समाज से संबंधित सभी गतिविधियों और समाचारों को माहेश्वरी समाज के लोगों के साथ साझा करने के लिए समर्पित है।

symbol-of-maheshwari-samachar-monthly-newsmagazine-dedicated-to-maheshwari-community